दीपावली, श्री महागणपति, महालक्ष्मी और महामाया महाकाली की पूजन और साधना का अत्यंत पवित्र पर्व है। इस दिन नए व्यवसाय या उद्योग की शुरुआत करने तथा पुराने खातों का पूजन करने की परंपरा प्रचलित है।
धर्मशास्त्रों के अनुसार दीपावली अमावस्या की रात, अर्थात प्रदोष काल और महानिशीथ काल में मनाई जाती है। यहाँ प्रदोष काल गृहस्थों और व्यापारियों के लिए महत्वपूर्ण है, जबकि महानिशीथ काल तांत्रिक या आगम शास्त्रीय विधियों से पूजन के लिए उत्तम माना गया है।
प्रदोष काल का महत्व:
दिन विष्णु स्वरूप और रात लक्ष्मी स्वरूप होती है।
दिन-रात्रि के इस संयोग को प्रदोष काल कहा जाता है।
धर्मसिन्धु में उल्लेख है कि प्रदोष काल में दीप प्रज्ज्वलित करके घरों को सजाना चाहिए और पितरों के लिए श्राद्ध करना चाहिए।
इस वर्ष दीपावली का समय (2025)
इस वर्ष, श्री शुभ संवत् 2082, शाके 1947, कार्तिक कृष्ण अमावस्या प्रदोष कालीन 20 अक्टूबर 2025, सोमवार को है।
चतुर्दशी तिथि: सूर्योदय से अपराह्न 03:46 तक
अमावस्या तिथि प्रारम्भ: अपराह्न 03:46 के बाद
दीपावली पूजन के लिए महत्वपूर्ण समय:
प्रदोष काल: शाम 05:27 से रात्रि 08:09 तक
स्थिर लग्न वृष: शाम 06:50 से रात्रि 09 :47 तक
चर चौघड़िया: शाम 05:27 – शाम 07:01
लाभ चौघड़िया:रात्रि 10:06 – रात्रि 11:43
शुभ, अमृत, चर चौघड़िया (संयुक्त वेला) : रात्रि 01:18 – 06:02 (सूर्योदय पूर्व)
महानिशीथ काल: रात 11:45 – रात्रि 12:39
इसमें लाभ चौघड़िया: रात्रि 10:06 – रात्रि 01:18
स्थिर लग्न सिंह: रात्रि 01:18 – रात्रि 03:32
इसमें शुभ चौघड़िया: 01:18 – 02:53
इस प्रकार 20 अक्टूबर 2025 को अमावस्या रातभर रहेगी और उपरोक्त शुभ समयों में पूजन करना सर्वश्रेष्ठ रहेगा।
21 अक्टूबर 2025, मंगलवार की स्थिति
21 अक्टूबर 2025, मंगलवार को सूर्योदय से शाम 05:55 तक अमावस्या तिथि रहेगी। उसके बाद कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा प्रारंभ हो जाएगी।
प्रदोष काल: शाम 05:27 – रात्रि 08:06
स्थिर लग्न वृष: शाम 06:46 –रात्रि 08:43
इसमें काल चौघड़िया: सायं 05:26 –सायं 07:00 (अशुभ)
लाभ चौघड़िया: 07:00 – 08:34
विशेष ध्यान देने योग्य बात यह है कि इस दिन अमावस्या तिथि सूर्यास्त के बाद केवल 29 मिनट रहेगी। इसके कारण पूजन का समय सीमित और कठिन है, क्योंकि इसमें अशुभ चौघड़िया का प्रभाव भी रहेगा।
महानिशीथ काल और स्थिर लग्न सिंह के समय, अमावस्या तिथि समाप्त हो चुकी होगी और शुक्ल प्रतिपदा प्रारंभ हो चुकी होगी। इसलिए 21 अक्टूबर को पूजा हेतु समय बहुत सीमित और असुविधाजनक रहेगा
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