Tuesday, October 14, 2025

दीपावली: पांच दिवसीय महापर्व का उल्लास

 भारत के त्योहारों में दीपावली सबसे भव्य और आनंदमय माना जाता है। यह केवल एक दिन का पर्व नहीं, बल्कि पांच दिन तक चलने वाला महापर्व है। कार्तिक मास की अमावस्या को दीपावली का मुख्य दिन होता है, और इसके चारों ओर जुड़े पर्वों की परंपरा इसे और खास बना देती है। आइए जानते हैं दीपावली के पांच पर्व और उनकी महिमा।

1. धनतेरस (धन्वंतरि त्रयोदशी)


दीपावली की शुरुआत होती है धनतेरस से। इसे धन्वंतरि त्रयोदशी भी कहा जाता है। आमतौर पर लोग इस दिन नए बर्तन और आभूषण खरीदते हैं, लेकिन इस पर्व का असली महत्व धन में नहीं बल्कि स्वास्थ्य और लंबी आयु में है।

इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती है, जिन्हें आयुर्वेद का जनक माना जाता है और भगवान विष्णु का अवतार कहा गया है। उनकी पूजा से शरीर और मन की सुरक्षा होती है, और रोग-व्याधि से बचाव में मदद मिलती है।

2. नरक चतुर्दशी


दीपावली का दूसरा दिन है नरक चतुर्दशी। पुराणों के अनुसार, द्वापर युग में राक्षस नरकासुर ने लोगों को परेशान किया था। भगवान कृष्ण ने नरकासुर का वध किया और उसी दिन को यह पर्व मनाने की परंपरा शुरू हुई।

इस दिन घर-घर में दीपक जलाए जाते हैं। मुख्य द्वार पर चार बत्तियों वाला दीपक यमदेव को समर्पित होता है। रसोईघर, जल स्थान, गौशाला और मंदिर में भी दीपक जलाकर घर को पवित्र किया जाता है।

3. दीपावली – महालक्ष्मी पूजन

दीपावली का मुख्य दिन है अमावस्या, और यह दिन है महालक्ष्मी पूजन का। दीपावली का अर्थ है - अंधकार पर प्रकाश और असत्य पर सत्य की जीत।

इस दिन घर-घर दीपक जलाकर महालक्ष्मी का स्वागत किया जाता है। साथ ही गणपति पूजन, अंबिका पूजन, गौरी पूजन, षोडश मातृका पूजन, कलश पूजन और नवग्रह पूजन भी किए जाते हैं।

पूजन के बाद घर में मिठाई बाँटी जाती है और खुशियों के इज़हार के लिए पटाखे भी चलाए जाते हैं। यह दिन सुख-समृद्धि और धन की वृद्धि का प्रतीक माना जाता है।

4. गोवर्धन पूजा / अन्नकूट

दीपावली के अगले दिन मनाई जाती है गोवर्धन पूजा, जिसे अन्नकूट पर्व भी कहा जाता है।

यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण की गोवर्धन पर्वत उठाने की कथा से जुड़ा है। ब्रजवासियों को इंद्र की वर्षा से बचाने के लिए उन्होंने अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत धारण किया था। इस दिन लोग अन्नकूट बनाकर भगवान को भोग लगाते हैं और मंदिरों में प्रसाद वितरित किया जाता है।

साथ ही श्री विश्वकर्मा जी की पूजा भी होती है, और औजार तथा मशीनों को समर्पित कर उनकी सुरक्षा और कार्यक्षमता की कामना की जाती है।

5. भैया दूज / भ्रातृ द्वितीया

पांच दिन के महापर्व का अंतिम दिन है भैया दूज, जिसे यम द्वितीया या भ्रातृ द्वितीया भी कहते हैं।

इस दिन बहनें अपने भाइयों की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं और उनका तिलक करती हैं। पुराणों के अनुसार, यमी ने अपने भाई यम की सुरक्षा और दीर्घायु के लिए व्रत रखा था। भगवान सूर्य ने यमी की भक्ति से प्रसन्न होकर इस दिन व्रत रखने वाली बहनों और उनके भाइयों को दीर्घायु का वरदान दिया।

अंत में

दीपावली महज दीपों और पटाखों का उत्सव नहीं है, बल्कि यह सत्य, धर्म और भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक है। यह पांच दिवसीय महापर्व हमें आध्यात्मिक और सामाजिक संदेश भी देता है—स्वास्थ्य का महत्व, अंधकार पर प्रकाश की जीत, परिवार और भाई-बहन का प्रेम।

दीपावली के दिन घर-घर रोशनी और खुशियों की झिलमिल हमें यह याद दिलाती है कि जीवन में प्रकाश और अच्छाई हमेशा बनी रहनी चाहिए। #दीपावली #दीपावली_महापर्व #पांच_दिवसीय_दीपोत्सव #धनतेरस #नरकचतुर्दशी #महालक्ष्मी_पूजन #गोवर्धन_पूजा #भैयादूज #भारतीय_त्योहार #प्रकाश_का_पर्व #DiwaliFestival #DiwaliVibes #FestivalOfLights #IndianCulture #DiwaliCelebration #सनातन #पवित्रता #ध्यान #मंत्र #पूजा #व्रत #धार्मिकअनुष्ठान #संस्कार #ऋभुकान्त_गोस्वामी #RibhukantGoswami #Astrologer #Astrology #LalKitab #लाल_किताब #PanditVenimadhavGoswamiFor more information: www.benimadhavgoswami.com

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