Showing posts with label #दीपावलीपूजन. Show all posts
Showing posts with label #दीपावलीपूजन. Show all posts

Tuesday, October 14, 2025

दीपावली – पावन पर्व और पूजन मुहुर्त


दीपावली, श्री महागणपति, महालक्ष्मी और महामाया महाकाली की पूजन और साधना का अत्यंत पवित्र पर्व है। इस दिन नए व्यवसाय या उद्योग की शुरुआत करने तथा पुराने खातों का पूजन करने की परंपरा प्रचलित है।

धर्मशास्त्रों के अनुसार दीपावली अमावस्या की रात, अर्थात प्रदोष काल और महानिशीथ काल में मनाई जाती है। यहाँ प्रदोष काल गृहस्थों और व्यापारियों के लिए महत्वपूर्ण है, जबकि महानिशीथ काल तांत्रिक या आगम शास्त्रीय विधियों से पूजन के लिए उत्तम माना गया है।


प्रदोष काल का महत्व:

दिन विष्णु स्वरूप और रात लक्ष्मी स्वरूप होती है।

दिन-रात्रि के इस संयोग को प्रदोष काल कहा जाता है।

धर्मसिन्धु में उल्लेख है कि प्रदोष काल में दीप प्रज्ज्वलित करके घरों को सजाना चाहिए और पितरों के लिए श्राद्ध करना चाहिए।

इस वर्ष दीपावली का समय (2025)

इस वर्ष, श्री शुभ संवत् 2082, शाके 1947, कार्तिक कृष्ण अमावस्या प्रदोष कालीन 20 अक्टूबर 2025, सोमवार को है।

चतुर्दशी तिथि: सूर्योदय से अपराह्न 03:46 तक

अमावस्या तिथि प्रारम्भ: अपराह्न 03:46 के बाद

दीपावली पूजन के लिए महत्वपूर्ण समय:

प्रदोष काल: शाम 05:27 से रात्रि 08:09 तक

स्थिर लग्न वृष: शाम 06:50 से रात्रि 09 :47 तक

चर चौघड़िया:  शाम 05:27 – शाम 07:01

लाभ चौघड़िया:रात्रि 10:06 – रात्रि 11:43 

शुभ, अमृत, चर चौघड़िया (संयुक्त वेला) : रात्रि 01:18 – 06:02 (सूर्योदय पूर्व)

महानिशीथ काल: रात 11:45 – रात्रि 12:39

इसमें लाभ चौघड़िया: रात्रि 10:06 – रात्रि  01:18

स्थिर लग्न सिंह: रात्रि 01:18 – रात्रि 03:32

इसमें शुभ चौघड़िया: 01:18 – 02:53

इस प्रकार 20 अक्टूबर 2025 को अमावस्या रातभर रहेगी और उपरोक्त शुभ समयों में पूजन करना सर्वश्रेष्ठ रहेगा।


21 अक्टूबर 2025, मंगलवार की स्थिति

21 अक्टूबर 2025, मंगलवार को सूर्योदय से शाम 05:55 तक अमावस्या तिथि रहेगी। उसके बाद कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा प्रारंभ हो जाएगी।


प्रदोष काल: शाम 05:27 – रात्रि 08:06

स्थिर लग्न वृष: शाम 06:46 –रात्रि 08:43

इसमें काल चौघड़िया: सायं 05:26 –सायं 07:00 (अशुभ)

लाभ चौघड़िया: 07:00 – 08:34

विशेष ध्यान देने योग्य बात यह है कि इस दिन अमावस्या तिथि सूर्यास्त के बाद केवल 29 मिनट रहेगी। इसके कारण पूजन का समय सीमित और कठिन है, क्योंकि इसमें अशुभ चौघड़िया का प्रभाव भी रहेगा।

महानिशीथ काल और स्थिर लग्न सिंह के समय, अमावस्या तिथि समाप्त हो चुकी होगी और शुक्ल प्रतिपदा प्रारंभ हो चुकी होगी। इसलिए 21 अक्टूबर को पूजा हेतु समय बहुत सीमित और असुविधाजनक रहेगा

#दीपावली2025 #दीपावलीपूजन #अमावस्या #प्रदोषकाल #महानिशीथकाल #लक्ष्मीपूजन #श्रीगणेशपूजन  #धार्मिक_समय #शुभमुहूर्त #दीपमालिका #तांत्रिकपूजन #पारंपरिक_त्योहार #दीपावलीविशेष #धार्मिक_ज्ञान #सनातन #पवित्रता #ध्यान #मंत्र #पूजा #व्रत #धार्मिकअनुष्ठान #संस्कार #ऋभुकान्त_गोस्वामी #RibhukantGoswami #Astrologer #Astrology #LalKitab #लाल_किताब #PanditVenimadhavGoswami

For more information: www.benimadhavgoswami.com Website: www.himachalpublications.com WhatsApp 9540166678 Phone no. 9312832612 Facebook: Ribhukant Goswami Instagram: Ribhukant Goswami Twitter: Ribhukant Goswami Linkedin: Ribhukant Goswami Youtube: AstroGurukulam Youtube: Ribhukant Goswami

दीपावली पर लक्ष्मी-गणेश की साथ-साथ पूजा: क्यों और कैसे?

 दीपावली हमारे देश का सबसे प्रिय और प्राचीन त्योहार है। इस दिन घर-घर में रोशनी की जाती है और धन-संपत्ति की देवी लक्ष्मी जी की विशेष पूजा होती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि लक्ष्मी जी के साथ गणेश जी की पूजा भी क्यों की जाती है? आइए जानते हैं इस विशेष परंपरा के पीछे का रहस्य और पूजा की विधि।


1. क्यों की जाती है गणेश जी की पूजा?

धर्मशास्त्रों में लिखा है कि कोई भी शुभ कार्य गणेश पूजन के बिना पूरा नहीं माना जाता। गणेश जी को बुद्धि, विवेक और विघ्न विनाशक कहा जाता है।

  • अगर आपके पास धन है, लेकिन बुद्धि नहीं है, तो आप उसका सही इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे।

  • गणेश जी का विशाल उदर संपत्ति और उत्पादन का प्रतीक है।

  • उनकी सूंड कुशाग्र बुद्धि का प्रतीक है।

  • उनका एक दांत कृषक के हल के फाल जैसा है, जो मेहनत और साधना का प्रतीक है।

इसलिए लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा साथ-साथ करना आवश्यक माना गया है। जहां लक्ष्मी जी धन और ऐश्वर्य देती हैं, वहीं गणेश जी बुद्धि और संकटमोचन का वरदान देते हैं।

2. पौराणिक कथा से सीख

कहा जाता है कि एक वीतरागी साधु को लक्ष्मी जी ने वरदान दिया कि वह राजा के दरबार में उच्च पद पाएगा। समय के साथ साधु अहंकारी बन गया और बुद्धि का गलत उपयोग करने लगा।

जब उसने गणेश जी की मूर्ति का अनादर किया, तो उसकी बुद्धि और सम्मान दोनों बिगड़ गए। अंततः लक्ष्मी जी ने उसे स्वप्न में गणेश जी की पूजा करने का आदेश दिया। जब उसने गणेश जी की पूजा की, तो उसका ज्ञान और सम्मान पुनः लौट आया।

सीख: धन और ऐश्वर्य मिलने पर अहंकार नहीं करना चाहिए। बुद्धि के देवता गणेश जी की उपासना अनिवार्य है।

3. दीपावली पर पार्थिव मूर्ति पूजन

दीपावली पर अक्सर घर में मिट्टी से बनी गणेश और लक्ष्मी की मूर्तियाँ लाई जाती हैं।

  • पार्थिव मूर्ति पूजन से अमीर-गरीब का भेद मिटता है और समाज में समानता आती है।

  • पूजा के बाद इन मूर्तियों को जल में विसर्जित किया जाता है।

  • धातु या अन्य मूल्यवान मूर्तियों में प्राण प्रतिष्ठा विशेष विधि से होती है और उन्हें विसर्जित नहीं किया जाता।

4. पूजा की सरल विधि

4.1 प्रतिमा स्थापना

  • गणेश और लक्ष्मी की मूर्तियों को पीले या लाल वस्त्र पहनाकर आसन पर रखें।

  • माता-पुत्र के रूप में उन्हें साथ में रखें।

4.2 गणेश पूजन

  • मंत्र: ॐ गं गणेशाय नमः

  • प्रतिमा को शुद्ध जल से स्नान कराएँ, फिर दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से स्नान करें।

  • वस्त्र और जनेऊ पहनाएँ, रोली-अक्षत और पुष्प अर्पित करें।

  • नैवेद्य में फल, मेवा और मोदक चढ़ाएँ।

  • गणेश जी के वाहन मूषक की पूजन भी करें।

4.3 लक्ष्मी पूजन

  • मंत्र: ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः

  • जल और कमल के पुष्प से स्नान कराएँ।

  • नैवेद्य में केसरयुक्त खीर, मिठाई और पंच मेवा चढ़ाएँ।

4.4 आरती और भजन

  • गणेश और लक्ष्मी जी की आरती अलग-अलग करें।

  • भजन, स्तोत्र और मंत्र जप के साथ पूजा पूर्ण करें।

4.5 दीपक जलाना

  • पूजा स्थल पर रात भर घी और तेल के दीपक जलाएँ।

5. मंत्र साधना

गणेश मंत्र

  1. ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं गं गणपतये वरवरदये नमः

  2. ॐ गं गणेशाय नमः

  3. ही गं ह्रीं महागणपतये स्वाहा

लक्ष्मी मंत्र

  1. ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलावे प्रसीद्वा प्रसीद

  2. ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः

  3. ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं

ध्यान रहे: मंत्र जप के समय मन एकाग्र और विश्वासपूर्ण होना चाहिए, तभी पूजा का फल मिलता है।

निष्कर्ष

दीपावली केवल रोशनी और मिठाई का त्योहार नहीं है। यह धन, बुद्धि और विवेक के साथ जीवन में संतुलन बनाए रखने का पर्व है। इसलिए इस दिन लक्ष्मी और गणेश जी की साथ-साथ पूजा करना अत्यंत आवश्यक है।

टिप: पूजा के समय थोड़ी-बहुत भूल या चूक हो जाए तो घबराने की जरूरत नहीं। सबसे महत्वपूर्ण है श्रद्धा और मन की एकाग्रता।

#दीपावलीपूजन  #लक्ष्मीगणेशपूजा  #शुभदीपावली  #धनतेरससेदीपावलीतक  #महालक्ष्मीपूजन  #गणेशलक्ष्मीकीकथा  #लक्ष्मीजीकीआरती  #गणेशजीकीमहिमा  #दीपोंकापर्व  #भारतीयसंस्कृति  #हिंदूपर्व  #लक्ष्मीगणेशव्रतकथा  #समृद्धिकापर्व  #देवपूजनपरंपरा  #Diwali2025 #सनातन #पवित्रता #ध्यान #मंत्र #पूजा #व्रत #धार्मिकअनुष्ठान #संस्कार #ऋभुकान्त_गोस्वामी #RibhukantGoswami #Astrologer #Astrology #LalKitab #लाल_किताब #PanditVenimadhavGoswamiFor more information: www.benimadhavgoswami.com
Website: www.himachalpublications.com WhatsApp 9540166678 Phone no. 9312832612 Facebook: Ribhukant Goswami Instagram: Ribhukant Goswami Twitter: Ribhukant Goswami Linkedin: Ribhukant Goswami Youtube: AstroGurukulam Youtube: Ribhukant Goswami

नौतपा 2026: आखिर क्यों माने जाते हैं साल के सबसे गर्म 9 दिन?

  गर्मी का मौसम आते ही लोग एक शब्द बार-बार सुनने लगते हैं — नौतपा । गांव हो या शहर, बड़े-बुजुर्ग अक्सर कहते हैं, “अभी तो नौतपा बाकी है, असली...