सनातन धर्म में एकादशी व्रतों का अपना एक अलग ही स्थान है। यह केवल उपवास भर नहीं, बल्कि मन को शुद्ध करने और ईश्वर से गहरा जुड़ाव बनाने का माध्यम माना जाता है।
इन्हीं एकादशी में से एक है — मोक्षदा एकादशी, जो इस बार 1 December 2025 को पड़ रही है। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी श्रद्धालु इस दिन भगवान श्रीकृष्ण की उपासना करके मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करेंगे।
मोक्षदा एकादशी का परिचय
मोक्षदा एकादशी शुक्ल पक्ष की एकादशी है और इसे दत्त जयंती भी कहा जाता है।
इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने महाभारत युद्ध के प्रारंभ से पहले अर्जुन को श्रीमद्भगवद्गीता का उपदेश दिया था।
इसी कारण यह एकादशी ज्ञान, मुक्ति और जीवन के वास्तविक अर्थ की याद दिलाती है।
क्यों माना जाता है यह दिन सबसे पावन?
गीता का संदेश — जीवन का सार
इस एकादशी पर गीता का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है क्योंकि गीता में बताया गया है—
आत्मा न जन्म लेती है, न कभी मरती है
शरीर केवल एक वस्त्र की तरह है
पुराने शरीर का त्याग और नए शरीर की प्राप्ति एक प्राकृतिक प्रक्रिया है
आज की भागदौड़ में भी ये बातें मन को स्थिर करने में बहुत मदद करती हैं।
मोक्षदा एकादशी व्रत: पालन विधि
मोक्षदा एकादशी का व्रत रखने की विधि बहुत सहज है, बस कुछ नियमों का ध्यान रखने की ज़रूरत होती है।
क्या न करें
झूठ बोलने से बचें
चुगली और निरर्थक विवादों से दूर रहें
किसी का मन दुखाना भी इस दिन वर्जित माना गया है
पूजा कैसे करें
सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें
भगवान दामोदर (श्रीकृष्ण) की पूजा करें
दीप, धूप, नैवेद्य अर्पित करें
गीता पाठ अवश्य करें
ब्राह्मण भोजन और दान का विशेष महत्व है
ऐसा माना जाता है कि इस दिन किया गया दान सामान्य दिनों की तुलना में कहीं अधिक फलदायी होता है।
मोक्षदा एकादशी की कथा — राजा वैखानस की कहानी
अब बात आती है इस एकादशी से जुड़ी पौराणिक कथा की, जो इस व्रत के महत्व को और भी अधिक बढ़ा देती है।
स्वप्न में दिखाई दिया पिता का कष्ट
बहुत समय पहले गोकुल नामक नगर में वैखानस नाम का राजा राज करता था।
वह दयालु और धर्मप्रिय था।
एक रात उसने स्वप्न में अपने पिता को यमदूतों से दंड पाते हुए देखा।
वह दृश्य इतना पीड़ादायक था कि राजा डरकर उठ बैठा।
सुबह होते ही उसने ज्ञानी ब्राह्मणों से पूछा—
“मेरे पिता की मुक्ति किस प्रकार संभव है?”
पर्वत ऋषि का निर्देश
ब्राह्मणों ने उसे पास स्थित पर्वत ऋषि के आश्रम जाने की सलाह दी।
राजा तुरंत वहाँ पहुँचा और ऋषि को सारा प्रसंग बताया।
ऋषि ने ध्यान करके उत्तर दिया—
“सामान्य धर्मकर्म अपना फल समय से देते हैं।
जल्दी फल देने वाला उपाय है — मोक्षदा एकादशी का व्रत।
तुम यह व्रत पूरे नियम से करो और इसका पुण्य अपने पिता को समर्पित कर दो।”
व्रत का चमत्कारिक प्रभाव
राजा ने परिवार सहित व्रत किया और संकल्पपूर्वक उसका फल अपने पिता को अर्पित किया।
कुछ समय बाद उसके पिता स्वर्ग की ओर प्रस्थान करते दिखे।
जाते समय उन्होंने कहा—
“पुत्र! तुम्हारे व्रत और श्रद्धा से ही मुझे मोक्ष प्राप्त हुआ है।”
इस कथा से यह स्पष्ट होता है कि यह व्रत केवल स्वयं के लिए ही नहीं, बल्कि पूर्वजों और पितरों के उद्धार के लिए भी अत्यंत प्रभावी माना गया है।
मोक्षदा एकादशी आपके लिए क्यों महत्वपूर्ण?
यह दिन मन से नकारात्मकता हटाकर शांति देता है
पितरों की मुक्ति के लिए सर्वोत्तम तिथि
श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त होती है
गीता पाठ से जीवन में दृढ़ता और स्पष्टता आती है
आध्यात्मिक शक्ति और मानसिक संतुलन मिलता है
समापन — श्रद्धा, भक्ति और सद्कर्म ही मोक्ष का मार्ग
मोक्षदा एकादशी हमें याद दिलाती है कि मुक्ति बाहरी चीज़ों में नहीं, बल्कि हमारे कर्मों, विचारों और श्रद्धा में छुपी है।यह एकादशी आपके जीवन में सुख, शांति और आध्यात्मिक उन्नति लाए—यही शुभकामना।

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