Monday, November 03, 2025

कार्तिक स्नान का पावन समापन — पुण्य, व्रत और दिव्य उत्सवों का महीना

 भारत की आध्यात्मिक परंपरा में कार्तिक मास का एक अलग ही तेज है। ऐसा माना जाता है कि यह महीना भगवान नारायण और भगवान शिव, दोनों का प्रिय काल है। सुबह-सुबह नदी किनारे स्नान, दीपदान, नाम जप और सात्विक जीवन — यही इसका सार है।

और जब कार्तिक स्नान पूर्ण होता है, तो मन में एक संतोष और पवित्रता का भाव स्वतः आ जाता है।


कार्तिक स्नान का महत्त्व

शास्त्रों में लिखा है कि जो व्यक्ति कार्तिक मास भर:

  • घर से बाहर किसी नदी/जलाशय में स्नान करे

  • गायत्री मंत्र का जाप करे

  • और दिन में एक बार सात्विक भोजन (हविष्य) ग्रहण करे

उसके पूरे वर्ष में हुए पाप नष्ट हो जाते हैं।

यह महीना केवल पूजा-पाठ का नहीं, बल्कि मन और इंद्रियों को अनुशासित करने का भी काल है।

कार्तिक में मांसाहार वर्जित क्यों?

बड़े-बड़े ग्रंथों में यह बताया गया है कि कार्तिक मास में, खासकर शुक्ल पक्ष में, मांस त्यागने से सौ वर्षों के कठोर तप का फल मिलता है।

कहा जाता है कि भगवान श्रीराम, राजा ययाति और राजा नल — सभी ने कार्तिक में मांस नहीं खाया था, और इसी का पुण्य उन्हें स्वर्ग प्राप्ति में सहायक बना।

कई पुराणों में यह भी उल्लेख आता है कि जो व्यक्ति इस महीने में मांस खाता है, उसके पुण्य कम हो जाते हैं और आध्यात्मिकता से दूरी बनती है। इसी कारण लोग इस मास में पूर्णत: सात्विक भोजन करते हैं।

कार्तिक शुक्ल पक्ष — हर दिन का अपना महत्व

कार्तिक शुक्ल पक्ष में एक-एक तिथि का अलग पुण्यफल माना गया है। आइए जानें:

1️⃣ शुक्ल प्रतिपदा

दीपावली के बाद आरम्भ होने वाला शुभ दिवस। नए कार्यों की शुरुआत के लिए अच्छा समय।

2️⃣ शुक्ल द्वितीया

  • यम-पूजन

  • भाई-बहन का पवित्र पर्व — भ्रातृद्वितीया (भाई दूज)

3️⃣ शुक्ल तृतीया

  • सती माता की पूजन

4️⃣ शुक्ल चतुर्थी

  • नाग देवता की पूजा

6️⃣ शुक्ल षष्ठी (महाषष्ठी)

  • अग्नि आराधना

  • अगर मंगलवार हो तो और भी शुभ माना जाता है

8️⃣ शुक्ल अष्टमी

  • देवी भगवती का पूजन

9️⃣ शुक्ल नवमी

  • विशेष श्राद्ध दिवस (बिना पिंडदान के श्राद्ध)

  • भगवती पूजा

🔟 शुक्ल दशमी

  • इस दिन केवल सन्ध्या समय दही ग्रहण करने का विधान

प्रबोधिनी एकादशी — भगवान विष्णु का जागरण

11️⃣ शुक्ल एकादशी

  • प्रबोधिनी एकादशी या उत्थान एकादशी

  • चातुर्मास समाप्त — भगवान विष्णु योगनिद्रा से जागते हैं

  • वैष्णवों के लिए अत्यंत विशेष तिथि

  • इसी दिन तुलसी विवाह आरम्भ होता है

12️⃣ शुक्ल द्वादशी

  • कई स्थानों पर तुलसी विवाह आज मनाया जाता है

13️⃣ शुक्ल त्रयोदशी

  • लिंगार्चन व्रत

14️⃣ शुक्ल चतुर्दशी — वैकुण्ठ चतुर्दशी

  • शिव और विष्णु दोनों की संयुक्त पूजा

  • प्राचीन परंपरा में गृहिणी भोजन का पहला स्वाद कल्याण हेतु लेती थी

कार्तिक पूर्णिमा — सबसे श्रेष्ठ दिन

कार्तिक मास का अंतिम और सबसे शुभ दिन — कार्तिक पूर्णिमा

यदि इस दिन कृत्तिका नक्षत्र हो, या चंद्र-बृहस्पति कृत्तिका में स्थित हों, तो इसे महाकरतिकी कहते हैं। और अगर सोमवार भी साथ हो जाए — तो समझिए वरदान के समान दुर्लभ संयोग!

इस दिन लोग:

  • तुलसी विवाह मनाते हैं

  • मंदिरों में दीपों की रौशनी से त्रिपुरोत्सव करते हैं

  • कई जगह बैल/साँड़ छोड़ने की परंपरा

  • ब्रह्मा जी की रथयात्रा

  • शिव की आराधना और दीपदान

सच में, लगता है जैसे पूरा वातावरण भक्ति से भर जाता है।

निष्कर्ष — आस्था का पवित्र मास

कार्तिक केवल एक महीना नहीं, आत्मा की सफाई का मौसम है।
इन दिनों का मूल संदेश है — सत्य, संयम, सेवा और साधना

जो इस मास को श्रद्धा से निभाता है, उसके भीतर दिव्य प्रकाश जगता है।
और जैसे-जैसे दीपक की लौ बढ़ती है, वैसे-वैसे जीवन भी रोशन होने लगता है।

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