हमारे सनातन धर्म में प्रत्येक तिथि का अपना एक विशेष महत्त्व होता है। इन्हीं में से एक है मित्र सप्तमी, जिसे विशेष रूप से सूर्य नारायण की आराधना के लिए मनाया जाता है। कई लोग इसके बारे में कम जानते हैं, इसलिए आज इस ब्लॉग में हम सरल भाषा में समझेंगे कि इस पवित्र व्रत की विधि क्या है और इसका आध्यात्मिक महत्त्व क्यों बताया गया है।
मित्र सप्तमी क्या है?
मार्गशीर्ष महीने के शुक्ल पक्ष की सप्तमी को ‘मित्र सप्तमी’ कहा जाता है। इस दिन सूर्य भगवान के ‘मित्र’ स्वरूप की पूजा की जाती है। हमारे शास्त्रों में सूर्य को केवल प्रकाश और ऊर्जा का स्रोत ही नहीं माना गया, बल्कि सृष्टि के पालनहारों में से एक माना गया है।
व्रत से पहले की तैयारी
इस व्रत की शुरुआत एक दिन पहले की जाती है।
सप्तमी के एक दिन पूर्व वपन (मुण्डन) कराया जाता है।
उसके बाद स्नान कर मन में व्रत का संकल्प लिया जाता है।
व्रती को इस पूरे समय सरल और सात्त्विक आहार का ही पालन करना चाहिए।
(नोट: कुछ क्षेत्रों में लोग प्रतीकात्मक रूप से बाल कटवाना या केवल कंघी-सेवन का नियम निभाते हैं, यह परम्परा परिवार की रीति अनुसार बदल जाती है)
मित्र सप्तमी की पूजा-विधि
सप्तमी के दिन स्नान कर सूर्य भगवान की पूजा की जाती है—
सूर्य देव का षोडशोपचार पूजन
आसन, जल, पुष्प, चंदन, नैवेद्य आदि का अर्पण
सूर्य स्तुति एवं आरती
ब्राह्मणों को भोजन कराना
पूजन के बाद व्रती शहद मिश्रित मीठे भोजन का सेवन करता है। इसे मधुप्लावित अन्न भी कहते हैं।
अष्टमी का विशेष नियम
कुछ ग्रंथों में यह भी कहा गया है कि सप्तमी के दिन फलाहार किया जाए और अष्टमी को—
ब्राह्मणों, कलाकारों, नर्तकों आदि को भोजन करवाया जाए
व्रती स्वयं भी शहद मिले अन्न का भोजन करे
यह कृतज्ञता और दान की भावना को दर्शाता है।
शास्त्रीय मान्यता: सूर्य का दिव्य स्वरूप
ब्रह्मपुराण के मुताबिक—
सूर्य देव किसी द्वारा निर्मित नहीं हैं
वे भगवान विष्णु की दाहिनी आँख से प्रकट हुए
माता अदिति और महर्षि कश्यप के पुत्र कहलाते हैं
उनके ‘मित्र’ रूप की आराधना से जीवन में प्रकाश, मित्रता और ऊष्मा आती है
सूर्य केवल भौतिक प्रकाश ही नहीं देते, वे आत्मिक ऊर्जा के स्रोत भी हैं।
इस व्रत का आध्यात्मिक लाभ
मन और शरीर में ऊर्जा का संचार
स्वास्थ्य में सुधार
जीवन में सफलता की अनुभूति
संबंधों में मधुरता
आत्मविश्वास और तेज़ (ओज) की प्राप्ति
सच कहूँ तो, सूर्य देव का ध्यान करने से एक अलग ही तरह का उत्साह मन में आता है। सुबह सूर्योदय के समय प्रातः जल अर्पित करते हुए “ॐ सूर्याय नमः” जप करने का अनुभव वाकई अलौकिक होता है।
अंतिम विचार
मित्र सप्तमी केवल एक धार्मिक परम्परा नहीं, बल्कि जीवन में प्रकाश, सत्य और ऊर्जा स्थापित करने का सुंदर अवसर है। आज की व्यस्त जीवनशैली में भी यदि हम कुछ पल सूर्य भगवान की आराधना में लगा दें, तो जीवन में सकारात्मक परिवर्तन स्वतः आने लगते हैं।
कभी समय मिले, तो इस व्रत को नियम से करें—देखना मन में अद्भुत शांति और तेज़ उत्पन्न होता है। #MitraSaptami #SuryaDevPuja #HinduRituals #SanatanDharma #IndianFestivals #SuryaAradhana #SaptamiVrat #VedicTradition #SpiritualBlogs #HinduCulture #IndianSpirituality #SuryaNamaskar #DevotionalLifestyle #FestivalsOfIndia #BhaktiPath #सनातन #पवित्रता #ध्यान #मंत्र #पूजा #व्रत #धार्मिकअनुष्ठान #संस्कार #ऋभुकान्त_गोस्वामी #RibhukantGoswami #Astrologer #Astrology #LalKitab #लाल_किताब #PanditVenimadhavGoswami
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