गर्मी का मौसम आते ही लोग एक शब्द बार-बार सुनने लगते हैं — नौतपा। गांव हो या शहर, बड़े-बुजुर्ग अक्सर कहते हैं, “अभी तो नौतपा बाकी है, असली गर्मी तब पड़ेगी।”
सच कहें तो भारत में नौतपा सिर्फ मौसम नहीं, बल्कि लोगों की जिंदगी और मान्यताओं से जुड़ा एक खास समय माना जाता है।
इस दौरान धूप इतनी तेज हो जाती है कि दोपहर में बाहर निकलना भी मुश्किल लगने लगता है। सड़के तपने लगती हैं, हवा में गर्मी की चुभन महसूस होती है और कूलर-पंखे भी कई बार जवाब देने लगते हैं।
क्या होता है नौतपा?
नौतपा गर्मियों के वे 9 दिन होते हैं, जब सूर्य देव रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं। आमतौर पर यह समय 25 मई से 2 जून के बीच माना जाता है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य लगभग 15 दिनों तक रोहिणी नक्षत्र में रहते हैं, लेकिन शुरुआती 9 दिन सबसे ज्यादा गर्म होते हैं। इसी कारण इन्हें नौतपा कहा जाता है।
पुराने समय में लोग मौसम को समझने के लिए प्रकृति और ग्रह-नक्षत्रों का सहारा लेते थे। शायद इसी वजह से नौतपा को लेकर इतनी मान्यताएं आज भी सुनने को मिलती हैं।
नौतपा में इतनी गर्मी क्यों पड़ती है?
इन दिनों सूर्य की किरणें सीधे पृथ्वी पर ज्यादा असर डालती हैं। यही कारण है कि तापमान अचानक बढ़ जाता है और लू चलने लगती है।
उत्तर भारत के कई हिस्सों में दोपहर का तापमान 45 डिग्री के आसपास तक पहुंच जाता है। बाहर निकलते ही ऐसा लगता है जैसे गर्म हवा चेहरे को जला रही हो।
कई लोग कहते हैं कि नौतपा की गर्मी अलग ही होती है। सुबह से ही धूप तीखी लगने लगती है और रात में भी गर्मी कम नहीं होती।
क्या नौतपा का बारिश से भी संबंध है?
गांवों में आज भी एक कहावत काफी मशहूर है —
“जितना तपे नौतपा, उतनी बरसे बारिश।”
लोक मान्यता के मुताबिक अगर नौतपा के दिनों में अच्छी गर्मी पड़े, तो मानसून भी अच्छा आता है। किसान इसे खेती के लिए शुभ संकेत मानते हैं।
हालांकि मौसम वैज्ञानिक इसे पूरी तरह वैज्ञानिक आधार नहीं मानते, लेकिन ग्रामीण इलाकों में आज भी लोग इस पर भरोसा करते हैं।
क्यों नहीं किए जाते शुभ काम?
नौतपा के दौरान शादी-विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन जैसे मांगलिक कार्य करने से लोग बचते हैं।
मान्यता है कि यह समय अत्यधिक तपन और अस्थिर मौसम का होता है, इसलिए शुभ कार्यों के लिए इसे सही नहीं माना जाता।
पहले के समय में तो लोग दोपहर में घर से निकलना भी टाल देते थे। शायद इसलिए भी इन दिनों बड़े आयोजनों से दूरी रखी जाती थी।
नौतपा में कैसे रखें अपना ध्यान?
सच कहें तो नौतपा में थोड़ी सी लापरवाही भी भारी पड़ सकती है। गर्मी और लू का असर शरीर पर जल्दी होता है। इसलिए कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है।
जरूरी सावधानियां
बिना जरूरत तेज धूप में बाहर न निकलें
सिर को गमछे या टोपी से ढककर रखें
खूब पानी पिएं, भले प्यास कम लगे
नींबू पानी, छाछ और बेल का शरबत फायदेमंद रहता है
बच्चों और बुजुर्गों का खास ध्यान रखें
दोपहर में ज्यादा देर बाहर रहना avoid करें
कई बार लोग सोचते हैं कि “थोड़ी देर में क्या होगा”, लेकिन लू बहुत जल्दी लग जाती है।
बदलते समय में भी कायम है नौतपा की चर्चा
आज विज्ञान और मौसम विभाग के दौर में भी नौतपा की चर्चा कम नहीं हुई है। सोशल मीडिया से लेकर घरों की बातचीत तक, हर जगह इसका जिक्र सुनने को मिल जाता है।
लोग आज भी मानते हैं कि नौतपा सिर्फ गर्मी नहीं, बल्कि प्रकृति का एक संकेत है।
हो सकता है आने वाले सालों में मौसम बदल जाए, लेकिन भारतीय परंपराओं में नौतपा का महत्व शायद हमेशा बना रहेगा।