दीपावली हमारे देश का सबसे प्रिय और प्राचीन त्योहार है। इस दिन घर-घर में रोशनी की जाती है और धन-संपत्ति की देवी लक्ष्मी जी की विशेष पूजा होती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि लक्ष्मी जी के साथ गणेश जी की पूजा भी क्यों की जाती है? आइए जानते हैं इस विशेष परंपरा के पीछे का रहस्य और पूजा की विधि।
1. क्यों की जाती है गणेश जी की पूजा?
धर्मशास्त्रों में लिखा है कि कोई भी शुभ कार्य गणेश पूजन के बिना पूरा नहीं माना जाता। गणेश जी को बुद्धि, विवेक और विघ्न विनाशक कहा जाता है।
अगर आपके पास धन है, लेकिन बुद्धि नहीं है, तो आप उसका सही इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे।
गणेश जी का विशाल उदर संपत्ति और उत्पादन का प्रतीक है।
उनकी सूंड कुशाग्र बुद्धि का प्रतीक है।
उनका एक दांत कृषक के हल के फाल जैसा है, जो मेहनत और साधना का प्रतीक है।
इसलिए लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा साथ-साथ करना आवश्यक माना गया है। जहां लक्ष्मी जी धन और ऐश्वर्य देती हैं, वहीं गणेश जी बुद्धि और संकटमोचन का वरदान देते हैं।
2. पौराणिक कथा से सीख
कहा जाता है कि एक वीतरागी साधु को लक्ष्मी जी ने वरदान दिया कि वह राजा के दरबार में उच्च पद पाएगा। समय के साथ साधु अहंकारी बन गया और बुद्धि का गलत उपयोग करने लगा।
जब उसने गणेश जी की मूर्ति का अनादर किया, तो उसकी बुद्धि और सम्मान दोनों बिगड़ गए। अंततः लक्ष्मी जी ने उसे स्वप्न में गणेश जी की पूजा करने का आदेश दिया। जब उसने गणेश जी की पूजा की, तो उसका ज्ञान और सम्मान पुनः लौट आया।
सीख: धन और ऐश्वर्य मिलने पर अहंकार नहीं करना चाहिए। बुद्धि के देवता गणेश जी की उपासना अनिवार्य है।
3. दीपावली पर पार्थिव मूर्ति पूजन
दीपावली पर अक्सर घर में मिट्टी से बनी गणेश और लक्ष्मी की मूर्तियाँ लाई जाती हैं।
पार्थिव मूर्ति पूजन से अमीर-गरीब का भेद मिटता है और समाज में समानता आती है।
पूजा के बाद इन मूर्तियों को जल में विसर्जित किया जाता है।
धातु या अन्य मूल्यवान मूर्तियों में प्राण प्रतिष्ठा विशेष विधि से होती है और उन्हें विसर्जित नहीं किया जाता।
4. पूजा की सरल विधि
4.1 प्रतिमा स्थापना
गणेश और लक्ष्मी की मूर्तियों को पीले या लाल वस्त्र पहनाकर आसन पर रखें।
माता-पुत्र के रूप में उन्हें साथ में रखें।
4.2 गणेश पूजन
मंत्र: ॐ गं गणेशाय नमः
प्रतिमा को शुद्ध जल से स्नान कराएँ, फिर दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से स्नान करें।
वस्त्र और जनेऊ पहनाएँ, रोली-अक्षत और पुष्प अर्पित करें।
नैवेद्य में फल, मेवा और मोदक चढ़ाएँ।
गणेश जी के वाहन मूषक की पूजन भी करें।
4.3 लक्ष्मी पूजन
मंत्र: ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः
जल और कमल के पुष्प से स्नान कराएँ।
नैवेद्य में केसरयुक्त खीर, मिठाई और पंच मेवा चढ़ाएँ।
4.4 आरती और भजन
गणेश और लक्ष्मी जी की आरती अलग-अलग करें।
भजन, स्तोत्र और मंत्र जप के साथ पूजा पूर्ण करें।
4.5 दीपक जलाना
पूजा स्थल पर रात भर घी और तेल के दीपक जलाएँ।
5. मंत्र साधना
गणेश मंत्र
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं गं गणपतये वरवरदये नमः
ॐ गं गणेशाय नमः
ही गं ह्रीं महागणपतये स्वाहा
लक्ष्मी मंत्र
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलावे प्रसीद्वा प्रसीद
ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः
ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं
ध्यान रहे: मंत्र जप के समय मन एकाग्र और विश्वासपूर्ण होना चाहिए, तभी पूजा का फल मिलता है।
निष्कर्ष
दीपावली केवल रोशनी और मिठाई का त्योहार नहीं है। यह धन, बुद्धि और विवेक के साथ जीवन में संतुलन बनाए रखने का पर्व है। इसलिए इस दिन लक्ष्मी और गणेश जी की साथ-साथ पूजा करना अत्यंत आवश्यक है।
टिप: पूजा के समय थोड़ी-बहुत भूल या चूक हो जाए तो घबराने की जरूरत नहीं। सबसे महत्वपूर्ण है श्रद्धा और मन की एकाग्रता।

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