Tuesday, October 14, 2025

कार्तिक मास और दीपदान की परंपरा: उजालों का त्योहार

 कार्तिक मास पंचांग में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इसे मासों का राजकुमार कहा जाता है। इस मास में दीपों की अनगिनत ज्योतियों से पूरी दुनिया जगमगाती है। प्रकृति ने शरद ऋतु का रूप, वैभव और दीपदान की परंपरा मिलाकर इसे इतना आकर्षक बना दिया है कि इसका महत्त्व हर साल बढ़ता ही जाता है।

दीप केवल रोशनी का साधन नहीं है, बल्कि यह सत्य और देवत्व का प्रतीक भी है। प्रारंभिक काल से सूर्य और अग्नि मानव जीवन के आलोक स्रोत रहे हैं। सूर्य की ऊर्जा ने चेतना और जीवन शक्ति दी, और दीप ने उसके प्रकाश को घर-घर तक पहुंचाया।


दीप का पौराणिक महत्व

स्कंद पुराण में दीप का जन्म यज्ञ अग्नि से बताया गया है। इसे सभी प्रकार की ज्योतियों में श्रेष्ठ माना गया है—
“अग्निज्योतीविज्योतिश्चन्द्रज्योतिस्त थे च उत्तमः सर्व ज्योतिषां दीपोऽयम्।”

वैदिक काल में यज्ञ अग्नि मानव और देवताओं के संपर्क का माध्यम थी। लेकिन जैसे-जैसे मंदिरों का निर्माण हुआ, दीप पूजा मुख्य साधन बन गई।

दीपदान केवल व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं होता। इसका उद्देश्य पूरे जगत को आलोकित करना और जीवन पथ को सुरक्षित बनाना भी है।

कार्तिक मास में दीपदान का महत्व

पुराणों के अनुसार, कार्तिक मास में प्रातः स्नान कर सूर्योदय और संध्या समय दीपदान करने वाला भगवान विष्णु की कृपा पात्र बनता है। कहा जाता है कि मृत्यु के बाद उसे मोक्ष प्राप्त होता है।

इस मास में देवालय, नदी किनारे और सड़क के किनारे दीप जलाने वालों को नरक का भय नहीं रहता और उन्हें सर्वतोमुखी लक्ष्मी प्राप्त होती है।

आकाशदीप: अंधकार में प्रकाश

कार्तिक मास में साधारण दीप के अलावा आकाशदीप का विशेष महत्व है। यह लंबी डंडी पर लटकाया गया दीपक यात्रियों और नाविकों के मार्गदर्शन का प्रमुख साधन था।

धार्मिक मान्यता है कि आकाशदीप से पितरों का मार्ग प्रशस्त होता है और नरक में पड़े पितर भी उत्तम गति को प्राप्त होते हैं। जो व्यक्ति आकाशदीप का दान करता है, वह न केवल मोक्ष प्राप्त करता है, बल्कि इस लोक में भी संपन्न होता है।

कार्तिक मास के विशेष दिवस

आश्विन पूर्णिमा से कार्तिक पूर्णिमा तक यह माह दीपों की ज्योति से जगमगाता रहता है। विशेषकर कृष्ण पक्ष के तीन दिन—त्रयोदशी, चतुर्दशी और अमावस्या—दीपोत्सव के रूप में मनाए जाते हैं।

  • त्रयोदशी: संध्या समय घर के बाहर दक्षिण दिशा में तिल का दीपक जलाकर यमराज के भय से मुक्ति मिलती है।

  • चतुर्दशी: भगवान कृष्ण द्वारा नरकासुर के उद्धार की स्मृति में दीपदान होता है। यह पापमुक्ति और पितरों की मुक्ति का प्रतीक है।

  • अमावस्या: इस दिन दीप जलाने से समग्र जगत आलोकित होता है।

दीपदान: व्यक्तिगत और सामूहिक कल्याण

दीपदान सिर्फ अपने पारलौकिक मार्ग को सुरक्षित बनाने या भौतिक सुख पाने का साधन नहीं है। इसका उद्देश्य सभी प्राणियों के जीवन पथ को सुरक्षित और आपदा रहित बनाना भी है।

जब यह कर्म समष्टि भलाई की भावना से किया जाता है, तो यह व्यक्तिगत कल्याण का भी साधन बनता है। दीपक स्वयं भी लोक कल्याण के लिए तम का नाश करता है और अपनी जीवन ऊष्मा समर्पित करता है। त्याग की यही शक्ति दीपक को ईश्वर और मानव के बीच पवित्रतम संपर्क का माध्यम बनाती है।

आज भी दीप जलाना तभी सार्थक है, जब इसे दान की भावना और लोकहित की कामना से किया जाए। #दीपदान_की_परंपरा #कार्तिक_मास_का_महत्व #दीपोत्सव_2025 #KartikPurnima #HinduTradition #SpiritualIndia #दीप_से_अंधकार_तक #DevDeepawali #BhaktiAndFaith #दीपक_की_कहानी #KartikMonth #SanatanParampara #HinduCulture #LightOfFaith #KartikDeepdaan #सनातन #पवित्रता #ध्यान #मंत्र #पूजा #व्रत #धार्मिकअनुष्ठान #संस्कार #ऋभुकान्त_गोस्वामी #RibhukantGoswami #Astrologer #Astrology #LalKitab #लाल_किताब #PanditVenimadhavGoswamiFor more information: www.benimadhavgoswami.com Website: www.himachalpublications.com WhatsApp 9540166678 Phone no. 9312832612 Facebook: Ribhukant Goswami Instagram: Ribhukant Goswami Twitter: Ribhukant Goswami Linkedin: Ribhukant Goswami Youtube: AstroGurukulam Youtube: Ribhukant Goswami

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