भारतवर्ष में दीपावली सिर्फ दीप जलाने का त्योहार नहीं, बल्कि माता लक्ष्मी के स्वागत का भी पावन अवसर है। इस दिन अमावस्या की रात को घर-घर में विशेष पूजा होती है, ताकि सुख-समृद्धि और ऐश्वर्य स्थायी रूप से निवास करें। आइए जानते हैं लक्ष्मी पूजन की परंपरा और विधि।
🪔 संकल्प और शुरुआत
कार्तिक माह की कृष्ण अमावस्या को सुबह स्नान व नित्यकर्म के बाद सबसे पहले संकल्प लिया जाता है। संकल्प के शब्दों में यही भाव होता है कि –
"मेरी सभी बाधाओं का नाश हो, लंबी आयु, बल, स्वास्थ्य और सभी प्रकार के शुभ फल प्राप्त हों। गज, रथ, धन, ऐश्वर्य और समृद्धि निरंतर बढ़ती रहे। इसके लिए मैं माता लक्ष्मी, इन्द्र और कुबेर का पूजन करूँगा।"
🌸 व्रत और संध्या पूजा
इस दिन व्रत रखने की परंपरा है। दिनभर उपवास या नक्तव्रत कर शाम को पुनः स्नान किया जाता है। इसके बाद दीपमालिका, दीपवृक्ष आदि सजाए जाते हैं।
फिर तिजोरी, खजाने या घर के किसी साफ-सुथरे और शांत स्थान पर चौकी रखकर अक्षत (चावल) से अष्टदल बनाया जाता है। उसी पर श्री लक्ष्मी का आसन स्थापित किया जाता है।
🙏 पूजन की विधि
लक्ष्मी पूजन केवल माता लक्ष्मी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें इन्द्र और कुबेर का पूजन भी शामिल है।
लक्ष्मीजी को प्रणाम करते हुए कहा जाता है:
“नमस्ते सर्वदेवानां वरदासि हरेः प्रिया । या गतिस्त्वत्प्रपन्नानां सा मे भूयात्त्वदर्चनात् ॥”इन्द्रदेव की स्तुति:
“ऐरावतसमारूढो वज्रहस्तो महाबलः । शतयज्ञाधिपो देवस्तस्मा इन्द्राय ते नमः ॥”कुबेर की प्रार्थना:
“धनदाय नमस्तुभ्यं निधिपद्माधिपाय च । भवन्तु त्वत्प्रसादान्मे धनधान्यादिसम्पदः ॥”
🎁 पूजन सामग्री
लक्ष्मी पूजन के लिए उत्तम मिठाई, ताजे फल, सुंदर पुष्प, सुगंधित धूप और दीप आवश्यक माने जाते हैं। इन सबके साथ साधक को ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए श्रद्धा-भाव से पूजा करनी चाहिए।
🌟 लक्ष्मी पूजन का फल
कहा जाता है कि दीपावली की रात विधिपूर्वक लक्ष्मी, इन्द्र और कुबेर की पूजा करने से घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है, ऐश्वर्य का विस्तार होता है और परिवार में स्थायी सुख-शांति का वास होता है।

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