दीपावली की रौनक खत्म होने के बाद कार्तिक मास की शुक्ल द्वितीया को भाई-बहन का प्यार मनाने का खास दिन आता है। इसे भैया दूज कहते हैं। उत्तर और मध्य भारत में यही नाम प्रचलित है, जबकि पूर्व में इसे भाई-कोटा और पश्चिम में भाईबीज या भाऊबीज कहते हैं। यह दिन भाई-बहन के स्नेह और अपनापन का प्रतीक माना जाता है।
भैया दूज की परंपरा
इस दिन बहनें अपने भाई की लंबी उम्र, खुशहाली और समृद्धि की कामना करती हैं। बहनें अक्सर घर में गोबर से मांडना बनाती हैं, उसमें हल्दी और चावल से सुंदर चित्र बनाती हैं और सुपारी, पान, रोली, धूप, मिठाई रखकर दीप जलाती हैं। भाई को तिलक करने के बाद बहन उसे हाथ से बना स्वादिष्ट भोजन खिलाती है।
लोक मान्यता है कि बहन के घर भोजन करने से भाई पर यमराज की बाधा नहीं आती, और उसकी कीर्ति व समृद्धि बढ़ती है।
यम द्वितीया की पौराणिक कथा
भविष्य पुराण में इस पर्व की कथा वर्णित है। यमराज की बहन का नाम यमुना था। वह अपने भाई को बार-बार बुलाती, लेकिन यमराज नहीं आते थे। एक दिन यमराज अपने बहन के घर पहुंचे। यमुना ने पूरे सम्मान के साथ उनका स्वागत किया, मंगल-टीका लगाया और स्वादिष्ट भोजन कराया।
यमराज बहन के स्नेह से प्रसन्न हुए और वरदान मांगा। यमुना ने केवल एक ही वरदान माँगा कि
“आज का दिन हमेशा भाई-बहन के प्रेम का पर्व बनकर याद रखा जाए।”
तब से यह दिन हर साल भाई-बहन के प्रेम का पर्व बन गया।
भैया दूज से जुड़ी लोक कथाएँ
भैया दूज से कई लोक कथाएँ जुड़ी हैं, जैसे:
भाट-भाटिन की कथा
राजा चम्बर की कथा
बहन के टीका की कथा
इन सभी कथाओं में भाव, स्नेह और भाई-बहन के रिश्ते की महिमा झलकती है।
बहन के टीका की कहानी
इस कहानी में एक निर्धन भाई टीका लगवाने बहन के घर जाता है। रास्ते में शेर, नदी और पर्वत उसे रोकते हैं और कहते हैं,
“हम तुम्हें रोकेंगे क्योंकि तुम्हारी माता ने हमें चढ़ावा चढ़ाने की मनौती मांगी थी।”
भाई कहता है, “मैं बहन के टीका के लिए जाऊँगा, फिर आप मेरी बलि ले लीजिए।”
अंततः वह बहन के घर पहुँचता है, टीका लगवाता है और बहन के आशीर्वाद से सभी बाधाओं को पार करता है।
यह कथा बताती है कि भाई-बहन का प्रेम न केवल अपनापन बल्कि त्याग और स्नेह का भी प्रतीक है।
भैया दूज का आधुनिक महत्व
आज भी बहनें अपने भाई के लिए खाना बनाती हैं, उन्हें तिलक करती हैं और उनके लिए खुशियों और सफलता की कामना करती हैं। भाई बहन को उपहार देकर उनका आशीर्वाद लेते हैं। यह पर्व परिवार में स्नेह और अपनापन बनाए रखने का यादगार दिन है।
💛 निष्कर्ष:
भैया दूज केवल एक त्योहार नहीं है, यह भाई-बहन के अटूट प्रेम और स्नेह की याद दिलाने वाला दिन है। चाहे पुराणिक कथा हो या लोककथा, संदेश वही है — भाई-बहन का रिश्ता हमेशा खास और अनमोल होता है।
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