दीपावली, या दीवाली, सिर्फ रोशनी का त्योहार नहीं है। यह पर्व हमें सदाचार, भक्ति, और जीवन में समृद्धि की याद दिलाता है। भारत और विश्व के कई देशों में इसे बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस पावन पर्व के पीछे कई पौराणिक और ऐतिहासिक कथाएँ जुड़ी हुई हैं।
भगवान श्रीराम का स्वागत: अयोध्या की महिमा
सबसे प्रसिद्ध कथा के अनुसार, भगवान श्रीराम ने राक्षसों का नाश कर अपने चौदह वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटे। अयोध्यावासियों ने अपने नगर को दीपों और रंगोली से सजाया। तभी से दीपावली पर दीप जलाना और घरों को सजाना एक परंपरा बन गया।
लक्ष्मी माता का अवतरण
कहते हैं कि समुद्र मंथन के समय क्षीरसागर से माता लक्ष्मी प्रकट हुईं। देव और असुर इस मंथन से चौदह रत्न प्राप्त हुए, जिनमें माता लक्ष्मी भी थीं।
ब्रह्म पुराण के अनुसार, दीपावली की रात अर्धरात्रि को माता लक्ष्मी घर में प्रवेश करती हैं।
साफ-सुथरे और शुभ वातावरण वाले घर में वे स्थायी निवास करती हैं।
इसलिए दीपावली पर लक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व है।
ऐतिहासिक महत्व: सम्राट विक्रमादित्य
इतिहास में भी दीपावली का विशेष स्थान है।
सम्राट विक्रमादित्य ने शकों और हूणों को पराजित कर भारत भूमि को सुरक्षित किया। इसी दिन उन्होंने नया संवत् प्रारंभ किया। उसके बाद विद्वानों ने निर्णय लिया कि नया साल चैत्र सुदी प्रतिपदा से चलेगा।
वामन अवतार और बलि की कथा
एक समय दैत्यराज बलि ने देवताओं और माता लक्ष्मी को बंदी बना लिया। भगवान विष्णु ने वामन रूप धारण कर बलि से केवल तीन पग भूमि मांगी।
बलि ने तीसरा पग अपने सिर पर रखने की अनुमति दी।
भगवान विष्णु ने तीन पग में पृथ्वी, आकाश और बलि के सिर को माप लिया।
बलि पाताल लोक गया और देवता तथा लक्ष्मी माता की मुक्ति हुई।
इस खुशी में इंद्र ने भी दीप जलाए।
नरसिंह अवतार और हिरण्यकश्यप
राक्षस राजा हिरण्यकश्यप ने स्वयं को ईश्वर घोषित किया और सभी प्रजा को उसकी पूजा के लिए बाध्य किया। लेकिन उसका पुत्र प्रहलाद सच्चे ईश्वर की भक्ति करता था।
हिरण्यकश्यप ने प्रहलाद को मारने का प्रयास किया।
तभी भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार धारण किया—आधा मानव, आधा सिंह।
उन्होंने प्रकट होकर हिरण्यकश्यप का विनाश किया।
इस घटना की स्मृति में दीप जलाने की परंपरा जुड़ी।
दीपावली और अन्य पौराणिक घटनाएँ
भगवान कृष्ण ने इस दिन कई राजाओं और 16,000 कन्याओं को राक्षस से मुक्त कराया।
सिक्ख धर्म में छठे गुरु हरगोविंद की मुग़ल सम्राट औरंगजेब की कैद से मुक्ति इसी दिन हुई।
जैन धर्म में चौबीसवें तीर्थंकर महावीर स्वामी का निर्वाण इसी दिन हुआ।
कृषि और ऋतु का महत्व
दीपावली केवल धार्मिक नहीं, बल्कि कृषि और ऋतु परिवर्तन का प्रतीक भी है।
यह पर्व शरद ऋतु में आता है और खरीफ की फसल कटने के समय मनाया जाता है।
कृषक अपने धन-धान्य से प्रसन्न होकर दीप जलाते थे।
इस दिन लक्ष्मी को नवान्न का भोग भी अर्पित किया जाता है।
अन्य ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व
स्वामी रामतीर्थ जी का जन्म और परिनिर्वाण दिवस।
महाभारत काल में युधिष्ठिर का राजसूय यज्ञ पूरा होना।
पौराणिक मान्यता है कि दीपावली पर माता लक्ष्मी अपने भक्तों को सुख और समृद्धि देने के लिए पृथ्वी पर आती हैं। इसलिए लोग अपने घरों को सजाते और दीप जलाकर उनका स्वागत करते हैं।
अंत में
दीपावली सिर्फ दीपों का त्योहार नहीं है, यह भक्ति, ऐतिहासिक गौरव, और जीवन में अच्छाई का प्रतीक है। हर दीपक यह संदेश देता है कि अज्ञान का अंधकार मिटाकर ज्ञान और भक्ति की रोशनी फैलाना चाहिए।

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