Monday, November 03, 2025

कार्तिक पूर्णिमा – दिव्य पुण्य और प्रकाश का पावन पर्व

 कार्तिक मास की पूर्णिमा को हिन्दू परंपरा में अत्यंत शुभ और पवित्र माना गया है। इसे त्रिपुरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान विष्णु ने अपना प्रथम अवतार — मत्स्य अवतार — धारण किया था। इसीलिये यह दिन विशेष आध्यात्मिक ऊर्जा और शुभता से भरा हुआ रहता है।

कहते हैं — “कार्तिक पूर्णिमा का एक दीपक, अंधेरे कर्मों का पर्वत भी मिटा देता है।”


कार्तिक पूर्णिमा क्यों है इतनी खास?

🕯️ दीपदान का महत्व

कार्तिक पूर्णिमा पर दीपक जलाने से

  • पापों का नाश होता है

  • घर और मन में शांति आती है

  • सौभाग्य और सुख-समृद्धि की वृद्धि होती है

शाम के समय नदी या सरोवर के किनारे दीप छोड़ते समय दिल में एक अजीब-सी शांति उतरती है… शायद यही इस तिथि का चमत्कार है।

गंगा स्नान और तीर्थ दर्शन

इस दिन गंगा स्नान और तीर्थ यात्रा का विशेष महत्व बताया गया है।
कहते हैं कि इस दिन किया गया स्नान, साधारण दिनों की तुलना में असीम पुण्य देता है।

तीन पवित्र पूर्णिमाएँ और उनके पावन स्थान:

पूर्णिमा

पवित्र स्थान

कार्तिक पूर्णिमा

पुष्कर

वैशाख पूर्णिमा

उज्जैन

माघ पूर्णिमा

वाराणसी

जो लोग तीर्थ नहीं जा पाते, वे घर में ताजे जल से स्नान कर प्रार्थना करते हैं — भावना ही सबसे बड़ी पूजा मानी गई है।

विशेष योग – पद्म योग

यदि कार्तिक पूर्णिमा के दिन

  • चंद्रमा कृतिका नक्षत्र में हो और

  • सूर्य विशाखा नक्षत्र में

तो बनता है दुर्लभ पद्म योग, जो धन, सुबुद्धि और सौभाग्य प्रदान करने वाला माना जाता है।

कृतिका देवियों का पूजन

इस दिन छह कृतिका देवियों का स्मरण और पूजन करने का विधान है।
इनकी उपासना से प्राप्त होते हैं:

  • क्षमा का वरदान

  • संतान का सौभाग्य

  • और मन का शुद्ध प्रकाश

कहते हैं — “जहाँ कृत्तिकाएँ प्रसन्न हों, वहां परिवार में कलह टिक ही नहीं सकता।”

 ब्राह्मण भोजन, हवन और दान

कार्तिक व्रत करने वालों के लिए इस दिन विशेष रूप से

  • ब्राह्मण भोजन

  • अग्निहोत्र / हवन

  • दीप दान

  • गोदान या वृष दान

का महत्व है।
विशेषकर वृष दान से कहा गया है कि —
“शिवलोक की प्राप्ति होती है।”

दान सिर्फ ब्राह्मणों को ही नहीं, बल्कि
बहन, भांजा, फूफा के पुत्र, मामा तथा ज़रूरतमंद रिश्तेदारों को देना श्रेष्ठ माना गया है।

यानी त्योहार सिर्फ पूजा का नहीं — परिवार जोड़ने और सेवा का भी है।

रामायण में इसका उल्लेख

भरत जी ने रामायण में माता कौशल्या को प्रण किया था कि —
यदि राम जी मेरी इच्छा से वन गए हों,
तो यह तीनों पवित्र पूर्णिमाएँ —
वैशाख, कार्तिक और माघ
उनके लिए दान रहित हो जाएँ।

यह दर्शाता है कि प्राचीन काल में भी इन तिथियों का कितना ज्य़ादा महत्व था।

निष्कर्ष

कार्तिक पूर्णिमा केवल एक तिथि नहीं,
यह दिल में भक्ति का दीप जलाने का अवसर है।

  • दीप जलाएँ

  • नदी या मंदिर जाएँ

  • दूसरों की मदद करें

  • और भगवान को याद करें

बस… दिल में श्रद्धा हो तो हर दीपक, हर दान, हर प्रार्थना फलदायी होती है।

#कार्तिकपूर्णिमा #त्रिपुरीपूर्णिमा #दीपदान #गंगास्नान #पुण्यपर्व #धार्मिकप्रेरणा #सनातनधर्म #हिंदूसंस्कृति #पौराणिकपरंपरा #शुभतिथि #व्रतऔरपूजा #आध्यात्मिकयात्रा #तीर्थयात्रा #पुण्यफल #भक्ति_भाव #सनातन #पवित्रता #ध्यान #मंत्र #पूजा #व्रत #धार्मिकअनुष्ठान #संस्कार #ऋभुकान्त_गोस्वामी #RibhukantGoswami #Astrologer #Astrology #LalKitab #लाल_किताब #PanditVenimadhavGoswami For more information: www.benimadhavgoswami.com Website: www.himachalpublications.com WhatsApp 9540166678 Phone no. 9312832612 Facebook: Ribhukant Goswami Instagram: Ribhukant Goswami Twitter: Ribhukant Goswami Linkedin: Ribhukant Goswami Youtube: AstroGurukulam Youtube: Ribhukant Goswami

No comments:

Post a Comment

मकर-संक्रान्ति गीत

   मकर-संक्रान्ति आई रे, ले आई उजियारा, सूरज बदले अपनी चाल, जग बोले जय-जयकारा। तिल-गुड़ की ये मिठास में, घुल जाए हर एक दूरी, दान, स्ना...