Thursday, January 01, 2026

77वाँ गणतन्त्र दिवस: एक जिम्मेदार लोकतंत्र की धड़कन

हर साल 26 जनवरी का दिन आते ही मन में एक अलग-सी हलचल शुरू हो जाती है। सुबह-सुबह तिरंगे को देखते ही दिल अपने-आप भर आता है। 77वाँ गणतन्त्र दिवस भी कुछ ऐसा ही एहसास लेकर आया है—गर्व, आत्मचिंतन और आगे बढ़ने का संकल्प। यह दिन सिर्फ छुट्टी या परेड देखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमें याद दिलाता है कि हम एक गणराज्य हैं, जहाँ असली ताकत जनता में निहित है।


गणतन्त्र दिवस का अर्थ क्या है?

अक्सर हम गणतन्त्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस को एक ही तराजू में रख देते हैं, लेकिन दोनों का भाव अलग है। स्वतंत्रता हमें आज़ादी देती है, जबकि गणतन्त्र हमें अधिकारों के साथ जिम्मेदारी भी सौंपता है।
26 जनवरी 1950 को देश ने अपना संविधान अपनाया और तभी से भारत ने खुद को कानून से चलने वाला राष्ट्र घोषित किया। यह सोच अपने-आप में बहुत बड़ी थी, खासकर उस समय के लिए।

26 जनवरी ही क्यों?

इस सवाल का जवाब इतिहास में छिपा है।
1930 में इसी तारीख को पूर्ण स्वराज की घोषणा की गई थी। इसलिए जब संविधान लागू करने का समय आया, तो 26 जनवरी को चुना गया। यह तारीख हमें याद दिलाती है कि आज़ादी सिर्फ मिलने से नहीं, बल्कि उसे सही दिशा में चलाने से सार्थक होती है।

77वाँ साल: अनुभव और उम्मीद के बीच

77 साल कोई छोटी अवधि नहीं होती। इतने समय में देश ने बहुत कुछ देखा है—उपलब्धियाँ भी, चुनौतियाँ भी।
आज का भारत तकनीक में आगे है, युवाओं से भरा है और दुनिया में अपनी पहचान मजबूती से रख रहा है। लेकिन साथ-साथ यह भी सच है कि हमें अब भी कई मोर्चों पर खुद को बेहतर बनाना है।
77वाँ गणतन्त्र दिवस इसी संतुलन की याद दिलाता है—गर्व भी और जिम्मेदारी भी।

परेड: सिर्फ शक्ति प्रदर्शन नहीं

नई दिल्ली की परेड अक्सर चर्चा में रहती है। सेना की टुकड़ियाँ, झाँकियाँ, झंडे—सब कुछ देखने में भव्य होता है।
लेकिन अगर गहराई से देखें तो यह परेड सिर्फ हथियारों या अनुशासन का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि यह बताती है कि भारत अपनी विविधता के साथ एकजुट है
हर राज्य की झाँकी एक कहानी कहती है—कभी संस्कृति की, कभी विकास की, तो कभी लोकजीवन की।

संविधान: किताब नहीं, जीवन दर्शन

हम में से बहुत-से लोगों ने संविधान को सिर्फ परीक्षा की किताब की तरह पढ़ा है। लेकिन असल में यह एक जीवन दर्शन है।
यह हमें बराबरी सिखाता है, बोलने की आज़ादी देता है और साथ ही यह भी कहता है कि दूसरों की आज़ादी का सम्मान करना उतना ही ज़रूरी है।
77वें गणतन्त्र दिवस पर यह सोचना जरूरी है कि क्या हम अपने अधिकारों जितना ही अपने कर्तव्यों को भी गंभीरता से लेते हैं?

युवा भारत और आने वाला कल

भारत युवा देश है, इसमें कोई शक नहीं।
गणतन्त्र दिवस युवाओं को यह याद दिलाता है कि देश का भविष्य सिर्फ सरकार या सिस्टम नहीं, बल्कि उनके रोज़मर्रा के फैसलों से बनता है।
ईमानदारी से काम करना, सही को सही और गलत को गलत कहना—ये छोटी बातें ही बड़े बदलाव की नींव बनती हैं।

एकता: हमारी असली पहचान

भाषा, धर्म, पहनावा, खान-पान—हम सब अलग-अलग हैं, और शायद यही हमारी सबसे बड़ी ताकत है।
गणतन्त्र दिवस हमें हर साल यह याद दिलाता है कि मतभेद हो सकते हैं, लेकिन मनभेद नहीं होने चाहिए।
देश तब मजबूत होता है, जब हम “मैं” से पहले “हम” सोचना सीखते हैं।

अंत में एक बात…

77वाँ गणतन्त्र दिवस कोई औपचारिक तारीख नहीं है। यह एक मौका है—
रुककर सोचने का, खुद से सवाल पूछने का और थोड़ा बेहतर नागरिक बनने का।
अगर हम अपने छोटे-छोटे कर्तव्यों को ईमानदारी से निभाएँ, तो शायद अगली पीढ़ी को एक और मजबूत, और ज्यादा न्यायपूर्ण भारत मिल सके। #गणतन्त्रदिवस #77वांगणतन्त्रदिवस #26जनवरी #भारतीयसंविधान #लोकतंत्रभारत #मेरा_भारत #देशभक्ति #तिरंगा #भारतीयनागरिक #भारतकीपहचान #राष्ट्रीयगौरव #संविधानकीशक्ति #एकतामेंभारत #ऋभुकान्त_गोस्वामी #RibhukantGoswami #PanditVenimadhavGoswami For more information: www.benimadhavgoswami.com Website: www.himachalpublications.com WhatsApp 9540166678 Phone no. 9312832612 Facebook: Ribhukant Goswami Instagram: Ribhukant Goswami Twitter: Ribhukant Goswami Linkedin: Ribhukant Goswami Youtube: AstroGurukulam Youtube: Ribhukant Goswami

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