जब फाल्गुन का महीना आता है और होली के रंग चारों ओर फैलने लगते हैं, उसी समय पंजाब की पवित्र धरती पर एक अलग ही उत्साह देखने को मिलता है। यह उत्साह है होला मोहल्ला का। यह केवल एक मेला नहीं, बल्कि सिख परंपरा की शान, इतिहास और साहस का जीवंत उत्सव है।
होला मोहल्ला मुख्य रूप से आनंदपुर साहिब में मनाया जाता है, जहां स्थित है पवित्र तख्त श्री केसगढ़ साहिब।
साल 2026 में यह पावन आयोजन 4 मार्च से 6 मार्च तक मनाया जाएगा। इन तीन दिनों में पूरा शहर श्रद्धालुओं, निहंग सिखों और पर्यटकों से भर जाता है।
होला मोहल्ला का इतिहास
होला मोहल्ला की परंपरा की शुरुआत सन् 1701 में हुई थी। इसके प्रवर्तक थे सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह।
कहते हैं कि गुरु जी ने होली के अगले दिन इस आयोजन की शुरुआत की, ताकि सिख समाज अपनी युद्धक क्षमता और साहस का प्रदर्शन कर सके। उस समय यह केवल उत्सव नहीं, बल्कि सैन्य अभ्यास जैसा आयोजन था।
आज भी जब निहंग सिख मैदान में उतरते हैं, तो लगता है जैसे इतिहास फिर से जीवित हो उठा हो।
होला मोहल्ला 2026 की तिथियाँ
प्रारंभ: 4 मार्च 2026
समापन: 6 मार्च 2026
मुख्य स्थल: तख्त श्री केसगढ़ साहिब, आनंदपुर साहिब
इन तीन दिनों में सुबह से रात तक कार्यक्रम चलते रहते हैं। कीर्तन, कथा, प्रदर्शन, सेवा—सब कुछ एक साथ।
मेले की प्रमुख विशेषताएँ
1. गतका और शस्त्र प्रदर्शन
होला मोहल्ला का सबसे आकर्षक दृश्य होता है निहंग सिखों द्वारा किया जाने वाला ‘गतका’ प्रदर्शन। घुड़सवारी, तलवारबाजी, भाले और अन्य शस्त्रों के साथ उनके करतब देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं।
यह केवल कला नहीं, बल्कि सिख इतिहास की वीरता का प्रतीक है। बच्चे, बुज़ुर्ग, महिलाएं—सब मंत्रमुग्ध होकर देखते रहते हैं।
2. नगर कीर्तन और शोभा यात्रा
अंतिम दिन एक विशाल नगर कीर्तन निकाला जाता है। इसमें ‘पंज प्यारे’ सबसे आगे चलते हैं। कीर्तन की मधुर ध्वनि और “जो बोले सो निहाल” के जयकारे वातावरण को भक्तिमय बना देते हैं।
सड़कें केसरिया रंग में रंगी दिखाई देती हैं। सच कहूं तो वह दृश्य शब्दों में पूरा बयां नहीं हो पाता।
3. लंगर और सेवा की परंपरा
होला मोहल्ला के दौरान विशाल स्तर पर लंगर लगाया जाता है। लाखों लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था की जाती है।
कोई अमीर-गरीब नहीं, कोई छोटा-बड़ा नहीं—सब एक पंक्ति में बैठकर प्रसाद ग्रहण करते हैं। यही सिख धर्म की असली खूबसूरती है।
सेवा करने वाले लोग बिना थके दिन-रात जुटे रहते हैं। कई बार तो बाहर से आए लोग भी सेवा में हाथ बंटाने लगते हैं।
अन्य स्थानों पर भी आयोजन
हालांकि आनंदपुर साहिब इस पर्व का मुख्य केंद्र है, लेकिन यह उत्सव श्री नयना देवी मंदिर और ऊना जिले के मैड़ी स्थित बाबा बड़भाग सिंह गुरुद्वारा में भी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।
इन स्थानों पर भी श्रद्धालुओं की अच्छी खासी भीड़ उमड़ती है। वातावरण में भक्ति और उत्साह साफ महसूस होता है।
निष्कर्ष
होला मोहल्ला वीरता, भक्ति और सेवा का अनोखा संगम है। यह हमें सिख इतिहास की गौरवपूर्ण परंपराओं की याद दिलाता है और साथ ही एकता का संदेश भी देता है।
यदि आप 2026 में कुछ अलग अनुभव करना चाहते हैं, तो 4 से 6 मार्च के बीच आनंदपुर साहिब की यात्रा अवश्य करें।
शायद आप भी लौटते समय अपने साथ केवल यादें नहीं, बल्कि एक नई ऊर्जा लेकर आएं। #HolaMohalla #HolaMohalla2026 #AnandpurSahib #PunjabFestival #SikhFestival #TakhtSriKesgarhSahib #GuruGobindSinghJi #Gatka #NihangSingh #SikhHistory #PunjabCulture #ReligiousFestival #SpiritualIndia #FestivalOfValor #IndianTraditions #SpiritualJourney #IndianPhilosophy #पवित्रता #ध्यान #धार्मिकअनुष्ठान #संस्कार #ऋभुकान्त_गोस्वामी #RibhukantGoswami #Astrologer #Astrology #LalKitab #लाल_किताब #PanditVenimadhavGoswami
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