Monday, March 02, 2026

शीतला अष्टमी 2026 (11 मार्च) – बसौड़ा व्रत की सम्पूर्ण जानकारी

 हर वर्ष चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को शीतला माता का पावन व्रत रखा जाता है। इस वर्ष शीतला अष्टमी 11 मार्च को मनाई जाएगी। कई स्थानों पर इसे होली के बाद आने वाले पहले सोमवार या गुरुवार को भी मनाया जाता है।

यह व्रत केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं है, बल्कि हमारे लोकजीवन, परिवार और स्वास्थ्य से गहराई से जुड़ा हुआ पर्व है। गाँवों में आज भी इसे बड़े श्रद्धाभाव से मनाया जाता है।


शीतला माता कौन हैं?

शास्त्रों में शीतला माता को रोगनाशिनी देवी माना गया है। विशेष रूप से चेचक, फोड़े-फुंसियाँ, नेत्र रोग, ज्वर और त्वचा संबंधी कष्टों से रक्षा करने वाली माता के रूप में उनकी पूजा की जाती है।

‘शीतलास्तोत्र’ में उनका स्वरूप इस प्रकार बताया गया है —
वन्देऽहं शीतलां देवीं रासभस्थां दिगम्बराम्।
मार्जनी-कलशोपेतां शूर्पालङ्कृतमस्तकाम्॥

अर्थात वे गधे पर विराजमान हैं, हाथ में झाड़ू और कलश धारण किए हुए हैं, और उनके मस्तक पर सूप सुशोभित है। यह स्वरूप प्रतीकात्मक है — स्वच्छता, शीतलता और रोगों के निवारण का।

शीतला अष्टमी का महत्व

लोकमान्यता है कि इस व्रत को करने से —

  • दाहज्वर, पीतज्वर और त्वचा रोग शांत होते हैं

  • बच्चों को होने वाले फोड़े-फुंसियों के दाग मिटते हैं

  • परिवार में सुख-शांति और आरोग्य बना रहता है

  • घर पर माता की कृपा बनी रहती है

गाँवों में बुजुर्ग आज भी कहते हैं — “बसौड़ा करो, घर में रोग नहीं टिकेगा।” शायद विज्ञान की भाषा में समझाएँ तो यह स्वच्छता और संयम का संदेश भी है।

बसौड़ा क्यों कहा जाता है?

इस व्रत की सबसे विशेष बात है — बासी भोजन

व्रत से एक दिन पहले ही सारे पकवान बना लिए जाते हैं। 11 मार्च को व्रत वाले दिन चूल्हा नहीं जलाया जाता। माता को ठंडा (शीतल) भोग लगाया जाता है।

इसी कारण इस पर्व को ‘बसौड़ा’ कहा जाता है।

एक दिन पहले क्या बनता है?

  • पूड़ी, पूआ

  • दाल-भात

  • लपसी

  • मिठाई

  • मेवा

  • मोंठ और बाजरा

घर की महिलाएँ एक दिन पहले बड़े प्रेम से ये सब तैयार करती हैं। सच कहूँ तो उस दिन की रसोई की खुशबू अलग ही होती है।

व्रत की विधि (पूजा कैसे करें?)

1. स्नान और संकल्प

प्रातःकाल ठंडे जल से स्नान करें। फिर संकल्प लें —
“मेरे घर में शीतला जनित रोगों के शमन तथा आयु, आरोग्य और समृद्धि की वृद्धि के लिए मैं शीतला अष्टमी व्रत कर रहा/रही हूँ।”

2. रसोई में छाप लगाना

रसोईघर की दीवार पर घी में पाँचों उँगलियाँ डुबोकर छाप लगाई जाती है। उस पर रोली और चावल अर्पित किए जाते हैं। यह एक बहुत पुरानी परंपरा है, शायद हमारे बचपन में हमने दादी को करते देखा होगा।

3. पूजन सामग्री

एक थाली में रखें —

  • भात

  • रोटी

  • दही

  • चीनी

  • जल

  • रोली

  • चावल

  • हल्दी

  • मूँग की दाल का छिलका

  • धूपबत्ती

  • मोंठ और बाजरा

इस थाली को घर के सभी सदस्यों से स्पर्श करवाकर शीतला माता के मंदिर में चढ़ाया जाता है।

4. चौराहे पर जल अर्पण

कई स्थानों पर चौराहे पर जल चढ़ाने की भी परंपरा है। यह लोकआस्था से जुड़ा विधान है।

5. वायना और आशीर्वाद

मोंठ-बाजरे का वायना निकालकर उस पर धन रखकर सास को भेंट किया जाता है। फिर किसी वृद्धा को भोजन कराकर दक्षिणा दी जाती है। यह केवल पूजा नहीं, परिवारिक सम्मान और सामाजिक सौहार्द का प्रतीक भी है।

कुंडारे भरने की परंपरा

कुछ घरों में बड़े और छोटे कुंडारे (मिट्टी के पात्र) भरने की परंपरा होती है। छोटे कुंडारों में बासी व्यंजन भरकर बड़े कुंडारे में रखा जाता है। हल्दी से पूजन कर माता के स्थान पर चढ़ाया जाता है।

पुत्र जन्म या विवाह के समय अतिरिक्त कुंडारे भरना शुभ माना जाता है।

शीतला माता की लोककथा

एक गाँव में एक स्त्री बसौड़े के दिन शीतला माता की पूजा करती थी और ठंडी रोटी खाती थी। बाकी गाँव वाले यह व्रत नहीं करते थे।

एक दिन गाँव में भीषण आग लगी। सबकी झोपड़ियाँ जल गईं, पर उस स्त्री की झोपड़ी सुरक्षित रही। लोगों ने कारण पूछा तो उसने बताया कि वह शीतला माता की पूजा करती है।

तब से पूरे गाँव में यह व्रत मनाया जाने लगा।

कहानी सुनते-सुनते मन में विश्वास जागता है… शायद यही आस्था की शक्ति है।

पारंपरिक लोकगीत

“मेरी माता का चिनिए चौबारा, दूध-पूत देने को चिनिए चौबारा।
किसने मैया ईंटें थपाई, किसने घोला है गारा?
श्रीकृष्ण ने ईंट थपाई, दाऊजी ने घोला है गारा…”

गीत गाते समय श्रीकृष्ण और दाऊजी के स्थान पर अपने परिवार के सदस्यों के नाम लिए जाते हैं। इससे एक अपनापन सा लगता है।

अंत में…

11 मार्च को जब आप शीतला अष्टमी मनाएँ, तो इसे केवल एक रस्म की तरह न करें। यह पर्व हमें सिखाता है —

  • स्वच्छता का महत्व

  • संयम

  • परिवार का सम्मान

  • और रोगों से बचाव

माता शीतला सब पर कृपा करें।
घर में सुख रहे, बच्चे स्वस्थ रहें… बस यही कामना है। #SheetalaAshtami #ShitalaMata #BasodaVrat #ShitalaAshtami2026 #11MarchFestival #HinduVrat #ChaitraAshtami #IndianTraditions #VratKatha #MataRani #SanatanDharma #HinduCulture #FestivalOfFaith #DesiRituals #BhaktiBhav #SpiritualJourney #IndianPhilosophy #SanatanDharma #सनातन #पवित्रता #ध्यान #मंत्र #पूजा #व्रत #धार्मिकअनुष्ठान #संस्कार #ऋभुकान्त_गोस्वामी #RibhukantGoswami #Astrologer #Astrology #LalKitab #लाल_किताब #PanditVenimadhavGoswami

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