हमारे सनातन धर्म में हर तिथि का अपना एक अलग महत्व होता है, लेकिन कुछ तिथियां ऐसी होती हैं जो सीधे आत्मा और पितरों से जुड़ी होती हैं। उन्हीं में से एक है फाल्गुनी अमावस्या। साल 2026 में यह पावन तिथि 17 फरवरी 2026 को पड़ रही है, और इस दिन का धार्मिक महत्व सामान्य अमावस्या से कहीं ज्यादा माना गया है।
फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या को शास्त्रों में विशेष फल देने वाली तिथि कहा गया है। खासकर लिंगपुराण में इस दिन के व्रत, पूजा और श्राद्ध की महिमा विस्तार से मिलती है।
लिंगपुराण में फाल्गुनी अमावस्या का महत्व
लिंगपुराण के अनुसार फाल्गुनी अमावस्या के दिन भगवान रुद्र, अग्निदेव और ब्राह्मणों का पूजन करना चाहिए। इस दिन उन्हें उड़द, दही, पूरी जैसे सात्त्विक भोजन का नैवेद्य अर्पित करना शुभ माना गया है।
साथ ही यह भी कहा गया है कि व्यक्ति को स्वयं भी इसी तरह का सादा और सात्त्विक भोजन केवल एक बार करना चाहिए। ऐसा करने से शरीर और मन दोनों शुद्ध रहते हैं और पूजा का फल भी कई गुना बढ़ जाता है।
विशेष योग: सूर्यग्रहण से भी बड़ा फल
शास्त्रों में एक श्लोक आता है, जिसका अर्थ बहुत ही गहरा है। उसमें कहा गया है कि यदि अमावस्या सोमवार, मंगलवार, गुरुवार या शनिवार को पड़े, तो वह अमावस्या सामान्य नहीं रहती, बल्कि उसे पुष्कर पर्व कहा जाता है।
ऐसी अमावस्या का फल सौ सूर्यग्रहणों से भी अधिक बताया गया है। यानी इस दिन किया गया दान, जप और श्राद्ध जीवन भर का पुण्य दे सकता है।
आज के समय में हम लोग सूर्यग्रहण का इंतजार करते हैं, लेकिन शास्त्र बताते हैं कि कुछ अमावस्याएं उनसे भी ज्यादा शक्तिशाली होती हैं।
फाल्गुनी अमावस्या और युग का प्रारंभ
एक मान्यता यह भी है कि फाल्गुनी अमावस्या के दिन ही युग का प्रारंभ हुआ था। इसी कारण इस तिथि को पितरों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है।
इस दिन विशेष रूप से अपिंड श्राद्ध करने का विधान बताया गया है। अपिंड श्राद्ध उन पितरों के लिए किया जाता है जिनका विधिवत श्राद्ध किसी कारण से नहीं हो पाया हो या जिनकी मृत्यु की तिथि ज्ञात न हो।
पितरों के लिए क्या करें इस दिन?
अगर सरल शब्दों में कहें तो इस दिन ज्यादा बड़े कर्मकांड की जरूरत नहीं है। बस भाव होना चाहिए।
सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें
भगवान शिव या रुद्र का स्मरण करें
गाय, कुत्ता, कौआ और जरूरतमंद को भोजन दें
ब्राह्मण को यथाशक्ति दान करें
अपने पितरों का नाम लेकर जल अर्पण करें
इतना सा करने से भी पितरों की आत्मा को शांति मिलती है, ऐसा माना जाता है।
आज के समय में इसका मतलब क्या है?
आज हम सब बहुत बिजी हो गए हैं। मोबाइल, काम, जिम्मेदारियां… इन सब में हम अपने पूर्वजों को शायद याद ही नहीं करते। लेकिन सच यही है कि हम जो कुछ भी हैं, उन्हीं की वजह से हैं।
फाल्गुनी अमावस्या जैसे दिन हमें थोड़ा रुककर सोचने का मौका देते हैं —
कि हम सिर्फ अपने लिए नहीं जी रहे, हम एक परंपरा का हिस्सा हैं।
17 फरवरी 2026 को आने वाली फाल्गुनी अमावस्या सिर्फ एक तिथि नहीं है, बल्कि एक मौका है —
अपने पितरों को याद करने का,
उनके लिए प्रार्थना करने का,
और अपने जीवन को थोड़ा सा और पवित्र बनाने का।

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